ध्वज वंदना

 आतम धर्म का प्रेरक ध्वज, यह सत्यम शिव सुंदर है महान |

परमेष्ठी अणुव्रत महाव्रत के, करते पांचों वरवान ||

पहला रंग है ‘लाल’ सत्य का, करता जग में उजियाला ;

सात तत्व की स्थिरता का, बोध कराता है आला ;

जीयो और जीने दो सबको, अरहंत का उपदेश महान ||1||

“पीलवर्ण” केशर सा सुंदर, है अचौर्य व्रत की पहचान ;

निर्भय होकर रहें सभी जन, शांति सुधा का करके पान ;

उपाध्याय जो स्वयं शांतिमय, वीतराग का करें वरवान ||2||

“श्वेत रंग” अहिंसा का दर्शक, स्वस्ति चिन्ह गति चार निशान,

शुद्ध स्वरूपी सिद्ध प्रभु का, देता है हम को यह ज्ञान;

अर्धचन्द्र शिवथल दर्शाता, रत्नत्रय त्रिय बिंदु मान ||3||

ब्रह्मचर्य का “हरित वर्ण” शुभ, हैं आचारज गुरु प्रधान,

हरे भरे भरपूर रहें नित, जो अनंत है वीरजवान,

दुखियों को सर सव्ज बनाना, हम सबको बतलाता ज्ञान ||4||

“नील वर्ण” अपरिग्रह द्योतक, ज्ञान ध्यान का हो चिंतन,

सर्वसाधू का जो है प्रतीक, करता ‘वसंत’ ध्वज वन्दन,

हिल मिल हम साथ चलें, ह्जाये ना पावे इसकी शान ||5||


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