तीस चौबीसी एवं कृत्रिम-अकृत्रिम चैत्यालय का अर्घ्य

तीन काल सम्बन्धी पाचों, भरत और ऐरावत में |
सर्व तीस चौबीसी प्रभो को, तीन योग से वंदूं मैं ||
त्रिलोक में कृत्रिम-अकृत्रिम, जहाँ-जहाँ चैत्यालय हैं |
अनर्घ्य पद हित अर्घ्य चढाऊँ, पा जाऊं सिद्धालय मैं ||

ॐ ह्रीं श्री त्रिकालसम्बन्धी तीसचौबीसी त्रिलोकसम्बन्धीकृत्रिमअकृत्रिमचैत्यालयेभ्यो अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||

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