ऊर्ध्व मध्य औ अधोलोक में, जितने भी हैं बिम्ब महान |
कृत्रिम और अकृत्रिम सबको, मन-वच-तन से करूं प्रणाम ||
चतुर्निकायी देव भक्ति से, जिनका वन्दन करते हैं |
उन बिंबों के चरण कमल में, अर्घ्य समर्पण करते हैं ||
ॐ ह्रीं श्री कृत्रिमाकृत्रिमचैत्यालयसम्बन्धीजिनबिम्बेभ्यो अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||