हूँ मैं चैतन्य चिदानन्द धाम
जानन देखन मेरा काम ||
निज से निज की हो पहचान, लीन रहूँ निज में अविराम |
हो जाऊं निर्मल निष्काम, अनंत शाश्वत सिद्ध समान || हूँ...
विषय कषाय दुख की खान, आत्मज्ञान सुख शांति निधान |
किन्तु मोहवश खोया ज्ञान, बना विकारी धर अज्ञान || हूँ...
पर को निज का कर्ता जान, निज को पर का कर्ता मान |
किया नहीं निज का कल्याण, रहते नित व्याकुल परिणाम || हूँ...
समयसार का करके पान, शुद्धातम को करूं प्रणाम |
प्रगट होय निज आतम राम, लक्ष्य यही पाऊँ शिवधाम || हूँ...
निश्चय नय से हूँ भगवान, खेकहे गुरु तू स्वयं महान |
भक्त स्वयं में तू गुणखान, “विद्यागुरु” का कर गुणगान || हूँ...