आठ दरबमय अरघ बनाय, द्यानत पूजौं श्रीजिनराय |
महासुख होय, देखे नाथ परम सुख होय ||
पाचों मेरु असि जिनधाम, सब प्रतिमा जी को करो प्रणाम |
महासुख होय, देखे नाथ परम सुख होय ||
ॐ ह्रीं पंचमेरु सम्बन्धि अशीतिजिन चैत्यालयस्थ जिनबिम्बेभ्यो अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||