जिनवाणी के ऑनलाइन संकलन का एक प्रयास
श्री अष्टापद सिद्धक्षेत्र का अर्घ्य (हिमालय पर्वत कैलाश)
जलादिक आठों द्रव्य लेय, भरि स्वर्णथार अर्घहि करेय |
जिन आदि मोक्ष कैलाश थान, मुन्यादी पाद जजूं जोरि पान ||
ॐ ह्रीं श्री कैलाशपर्वत सिद्धक्षेत्राय अनर्घ्यपद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||
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