श्री पावापुरी सिद्ध क्षेत्र (बिहार) का अर्घ्य

जल गंध आदि मिलाय वसुविध थार स्वर्ण भरायके |
मन प्रमुद भाव उपाय करले आय अर्घ्य बनायके ||
वर पदम्वन भर पदम्-सरवर बाहिर पावाग्राम ही |
शिवधाम सन्मति-स्वामी पायो, जजों सो सुखदा मही ||

ॐ ह्रीं श्री पावापुरी सिद्धक्षेत्राय अनर्घ्यपद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||

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