जल फल वसु द्रव्य मिलाय, लै भर हिम थारी |
वसु-अंग धरा पर ल्याय, प्रमुदित चितधारी ||
श्री वासुपूज्य जिनराय, निर्वृत्ति-थान प्रिया |
चम्पापुर-थल सुखदाय, पूजौं हर्ष हिया ||
ॐ ह्रीं श्री चम्पापुर सिद्धक्षेत्राय अनर्घ्यपद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||