श्री सोनागिरी सिद्धक्षेत्र (मध्यप्रदेश) का अर्घ्य

वसु द्रव्य ले भर थल कंचन अर्घ ले सब अरि हनूं |
छोटे चरण जिनराज लय हो शुद्ध निज आत्म बनूं ||
नंगाऽनंगादी मुनीन्द्र जहंतै मुक्ति लक्ष्मीपति भये |
सो परम गिरवर जजूं वसु विधि होत मंगल नित नये ||

ॐ ह्रीं श्री सोनागिरि सिद्धक्षेत्राय अनर्घ्यपद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||

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