जिनवाणी के ऑनलाइन संकलन का एक प्रयास
श्री कुंथलगिरि सिद्धक्षेत्र (महाराष्ट्र) का अर्घ्य
जल फलादि वसु दरव लेय थुति ठानके |
अर्घ जजों तुम पाप हरो हिय आनके ||
पूजौं सिद्ध सु क्षेत्र, हिये हरषायके |
कम मन-वच-तन शुद्ध, करम वसु टारके ||
ॐ ह्रीं श्री कुंथलगिरि सिद्धक्षेत्राय अनर्घ्यपद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||
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