श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र (गुजरात) का अर्घ्य

वसु द्रव्य मिलाई, थार भराई, सन्मुख आई नजर करो |
तुम शिव सुखदाई, धर्म बढाई, हर दुखदाई अर्घ करो ||
पांडव शुभ तीनं, सिद्ध लहीनं, आठ कोडी मुनि मुक्ति गये |
श्री शत्रुंजय पूजौं, सन्मुख हूजो, शांतिनाथ शुभ मूल नये ||

ॐ ह्रीं श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्राय अनर्घ्यपद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||

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