जिनवाणी के ऑनलाइन संकलन का एक प्रयास
श्री द्रोणगिरि सिद्धक्षेत्र (मध्यप्रदेश) का अर्घ्य
जल सु चंदन अक्षत लीजिये, पुष्प धर नैवेद्य गनीजिये |
दीप धूप सुफल बहु साजहीं, जिन चढाय सुपातक भाजहीं ||
ॐ ह्रीं श्री द्रोणगिरि सिद्धक्षेत्राय अनर्घ्यपद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||
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