जिनवाणी के ऑनलाइन संकलन का एक प्रयास
श्री चन्द्रप्रभनाथ जिनेन्द्र का अर्घ्य
सजि आठों द्रव्य पुनीत, आठों अंग नमूं |
पूजूं अष्टम जिन मीत, अष्टम अवनि गमूं ||
श्री चन्द्रनाथ दुतिचंद, चरनन चंद लसें |
मन-वच-तन जजत अमंद, आतम जोति जसे ||
ॐ ह्रीं श्री चन्द्रप्रभ स्वामिने अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||
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