श्री सुपार्श्वनाथ जिनेन्द्र का अर्घ्य

आठों दरब सजि गुनगाय, नाचत राचत भगति बढाय |
दयानिधि हो, जय जगबन्धु दयानिधि हो ||
तुम पद पूजूं मन-वच-काय, देव सुपारस शिवपुर राय |
दयानिधि हो, जय जगबन्धु दयानिधि हो ||

ॐ ह्रीं श्री सुपार्श्वनाथ जिनेन्द्राय अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||

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