जल फलादि वसु द्रव्य संवारे, अरघ चढ़ाए मंगल गाय |
बखत-रतन के तुम ही साहिब, दीज्यो शिवपुर राज कराय ||
शांतिनाथ पंचम चक्रेश्वर, द्वादश मदन तनो पद पाय |
तिन के चरण कमल के पूजे, रोग शोक दुःख दारिद जाय ||
ॐ ह्रीं श्री शांतिनाथ जिनेन्द्राय अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||