आरती श्री जिनपद्म तुम्हारी, प्रकट हुए तुम अतिशय धारी |
सुदी वैशाख पंचमी आई, जब तुम दरश दिए जिनराई || आरती श्री...
धरम-भूप के सूत महलाय, सुषमा-मात उदर प्रकटाये || आरती श्री...
कौशाम्बी भयो जन्म-कल्याणक, सुरपति तांडव नृत्य रचाए || आरती श्री...
काम-क्रोध मोहदिक मारे, मान कषाय तजे तुम सारे || आरती श्री...
कर्म घातिया मार भगाया, जब तुमने देवल पद पाया ||
आरती श्री जिनपद्म तुम्हारी, प्रकट हुए तुम अतिशय धारी |
सुदी वैशाख पंचमी आई, जब तुम दरश दिए जिनराई || आरती श्री...
धरम-भूप के सूत महलाय, सुषमा-मात उदर प्रकटाये || आरती श्री...
कौशाम्बी भयो जन्म-कल्याणक, सुरपति तांडव नृत्य रचाए || आरती श्री...
काम-क्रोध मोहदिक मारे, मान कषाय तजे तुम सारे || आरती श्री...
कर्म घातिया मार भगाया, जब तुमने देवल पद पाया ||
आरती श्री जिनपद्म तुम्हारी, प्रकट हुए तुम अतिशय धारी |