श्री वासुपूज्यनाथ भगवान की आरती

ॐ जय वासुपूज्य स्वामी, स्वामी वासुपूज्य स्वामी |
करत तुम्हारी ध्यान ही निश दिन, सुर-नर-मुनि-ज्ञानी ||
कपिष्ट स्वर्ग से चच करके प्रभु चम्पापुर जन्मे |
इंद्र आए अभिषेक कियो है मेरु शिखर जाई || ॐ जय...
पिता तुम्हारे वसुपुज्य जी, माँ विजयरानी |
तीन लोक में आनंद छायो, हर्षे नर-नारी || ॐ जय...
काया ऊँची सत्तर धनुष की, मुक्ता वर्ण सोहे |
पर-विभाव को छोड़ प्रभु जी निज रस में मोहे || ॐ जय...
बाल-ब्रम्हचारी तपधारी केवल ज्योति जगी |
समवशरण में प्रभु जी विराजे, बारह सभा लगी || ॐ जय...
अष्टकर्म को क्षय करके, प्रभु शिवपुर वास कियो |
हर सेवक प्रभु शीश नवायो, भव-भव पार कियो || ॐ जय...
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी, स्वामी वासुपूज्य स्वामी |
करत तुम्हारी ध्यान ही निश दिन, सुर-नर-मुनि-ज्ञानी ||

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