श्री आदिनाथ, जिनेन्द्र का अर्घ्य

आदि जिनेन्द्रा शिव किय कन्ता,
भरत बाहुबली लघु नंदा ||
भव भ्रमण हनुंता जग आनंदा.
सगुन अनंता भगवंता ||

ॐ ह्रीं श्री आदिनाथ भरत बाहुबली जिनेन्द्राय अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||

प्रिंट करें