प्रभु स्तुति

गुण गाते हैं, सुख पाते हैं, श्री आदिनाथ के चरणों में |
हम शीश झुकाते हैं, हम शीश नवाते हैं ||
प्रभु की प्रतिमा मनहारी है, सारे जग से अति न्यारी है |
हे नाथ आपको देखे मेरे, नयना हर्षाते हैं ||1||  गुण गाते....
प्रभु की मूरत कुछ बोल रही, निज आनन्द का रस घोल रही |
ऐसा लगता प्रभु भक्तों को, निज देश बुलाते हैं ||2|| गुण गाते...
मैं भटका था इस भव वन में, अब आया हूँ तेरे चरणन में |
हे नाथ आप ही भव्यों का, भव भ्रमण मिटाते हैं ||3|| गुण गाते...
जग में सुख के सब साथी हैं, दुख में देखा सब स्वार्थी हैं |
हे नाथ आपके सिवा यहाँ, सब झूठे नाते हैं ||4|| गुण गाते...
करुणासागर करुणा कर दो, शाश्वत सुख से झोली भर दो |
हे नाथ आप ही भक्तों को भगवान बनाते हैं ||5||
गुण गाते हैं, सुख पाते हैं, श्री आदिनाथ के चरणों में |
हम शीश झुकाते हैं, हम शीश नवाते हैं ||

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