जल फल वसुवृंदा अरघ अमंदा, जजत अनंदा के कंदा |
मेटो भवफंदा सब दुखदंदा, भक्त तुम वंदा ||
त्रिभुवन के स्वामी त्रिभुवन नामी, अंतरयामी अभिरामी |
शिवपुर विश्रामी निजनिधि पामी, सिद्ध जजामी शिरनामी ||
ॐ ह्रीं श्रीअनाहतपराक्रमाय सर्वकर्मविनिर्मुक्ताय सिद्धपरमेष्ठिने अनर्घ्यपद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||