श्री राजगिरि अतिशय क्षेत्र (बिहार) का अर्घ्य

वसु द्रव्य मिलाय भविमन भाये, प्रभु गुण गाये नृत्य करो |
भव भव दुखनाशा, शिवसुख भासा, चित्त हुलासा सुक्ख करो ||
श्री पंचमहागिरि तिन पर मन्दिर शोभित सुंदर सुखकारी |
जिन बिम्ब सुदर्शत आनन्द बरसत जन्म मृत्यु भम दुखहारी ||

ॐ ह्रीं श्री राजगृही क्षेत्राय अनर्घ्यपद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||

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