हूँ शुद्ध निराकुल सिद्धो सम भवलोक हमारा वासा ना |
रिपु रागरु द्वेष लगे पीछे, यातें शिवपद को पाया ना ||
निज के गुण में जिन के पाने को, प्रभु अर्घ संजोकर लाया हूँ |
हे बाहुबली तुम चरणों में, सुख सन्मति पाने आया हूँ ||
ॐ ह्रीं श्री बाहुबली जिनेन्द्राय अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||