मेरे शाश्वत-शरण, सत्य-तारणतरण ब्रम्ह प्यारे |
तेरी भक्ति से क्षण में जायें सारे ||टेक||
ज्ञान से ज्ञान में ज्ञान ही हो, कल्पनाओं का एकदम विलय हो |
भ्रान्ति का नाश हो, शांति का वास हो, ब्रम्ह प्यारे ||
तेरी भक्ति से क्षण में जायें सारे ||1||
सर्वगतियों में रह गति से न्यारे, सर्वभावों में रह उनसे न्यारे |
सर्वगत आत्मगत, रत न नाहीं विरत, ब्रम्ह प्यारे ||
तेरी भक्ति से क्षण में जायें सारे ||2||
सिद्धि जिनने भी अब तक है पाई, तेरे आश्रय ही उसमें सहाई |
मेरे संकटहरण, ज्ञान-दर्शन-चरण, ब्रम्ह प्यारे ||
तेरी भक्ति से क्षण में जायें सारे ||3||
देह-कर्मादि सब जग से न्यारे, गुण व पर्याय के भेदों से न्यारे |
नित्य अंत: अचल, गुप्त ज्ञायक अमल, ब्रम्ह प्यारे ||
तेरी भक्ति से क्षण में जायें सारे ||4||
आपका आप ही श्रेय तू है, सर्व श्रेयों में नित श्रेय तू है |
सहजानंदी प्रभो, अन्तर्यामी विभो, ब्रम्ह प्यारे ||
तेरी भक्ति से क्षण में जायें सारे ||4||