जल गंध आदि मिलाय आठों, दरब अरघ सजूं वरूं |
पूजूं चरन रज भगति जुत, जा तें जगत सागर तरूं ||
शिव साथ करत सनाथ सुव्रतनाथ, मुनि गुनमाल हैं |
तसु चरन आनंद भरन तारन, तरन विरद विशाल हैं ||
ॐ ह्रीं श्री मुनिसुव्रत जिनेन्द्राय अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||