जिनवाणी के ऑनलाइन संकलन का एक प्रयास
श्री शीतलनाथ जिनेन्द्र का अर्घ्य
शुभ श्रीफलादि वसु प्रासुक द्रव्य साजे |
नाचे रचे मचत बज्जत सज्ज बाजे ||
रागादि दोष मल मद्र हेतु येवा |
चर्चूं पदाब्ज तव शीतलनाथ देवा ||
ॐ ह्रीं श्री शीतलनाथ जिनेन्द्राय अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||
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