देखत मान गले मानी का, मान स्तम्भ सार्थक नाम |
चतुर्मुखी जिन बिम्ब बिराजे, भाव सहित मैं करूं प्रणाम ||
द्रव्य भाव मय अर्घ्य बनाकर, भाऊँ भावन मंगलकार |
वीतराग सर्वग्य अवस्था, पाऊँ जिनवर मैं अविकार ||
ॐ ह्रीं श्री चतुर्दिशे विराजित महावीर जिनेंद्रेभ्यों नम: अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||