बाहुबली भगवान का मस्तकाभिषेक |
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
पर्वत पर नर-नारी चले कलशों में नीर भरे |
होड़ लगी अभिषेक प्रभु का पहले कौन करे ||
नीर-क्षीर की बहती धारा फिर भी न भीगा तन सारा |
ऐसी अन्य विशाल मूर्ति का कहीं नहीं उल्लेख ||
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
ऐसा ध्यान लगाया प्रभु को रहा न ये आभास |
किस-किस ने चरणारविंद में बना लिया है वास ||
बात उन्हें यह भी न पता थी तन लिपटी माधवी लता थी |
ये लाखों में एक नहीं है दुनिया भर में एक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
महक रहे चन्दन केशर पुष्पों की झड़ी लगी |
देखने को यह दृश्य भीड़ यहाँ कितनी बड़ी लगी ||
ऐसी छटा लगे मन भावन फागुन बन बरसे ज्यों सावन |
आज यहाँ वे जुड़े जिन्होंने जोड़े पुण्य अनेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
बीते वर्ष सहस्त्र मूर्ति यह कब की गढ़ी हुई |
खड़े तपस्वी का प्रतीक बन कब से खड़ी हुई ||
श्री चामुण्डराय की माता इसका श्रेय उन्हीं को जाता |
उनके लिए गढ़ी प्रतिमा से लाभान्वित प्रत्येक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
ऋषभ देव मातु सुनन्दा भ्राता भरत समान |
घुट्टी में श्री बाहुबली को मिला धर्म का ज्ञान ||
चक्रवर्ती का शीश झुकाकर, प्रभुता छोड़ी प्रभुता पाकर |
विजय गर्व से पहले प्रभु ने धरा दिगम्बर भेष ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
गोम्मटेश का है संदेश धारो अपरिग्रहवाद |
सब कुछ होते सब कुछ त्यागो वो भी बिना विषाद ||
भौतिक बल पर मत इतराओ, दया क्षमा की शक्ति बढ़ाओ |
आत्महितके हेतु हृदय में जागृत करो विवेक |
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
पर्वत पर नर-नारी चले कलशों में नीर भरे |
होड़ लगी अभिषेक प्रभु का पहले कौन करे ||
नीर-क्षीर की बहती धारा फिर भी न भीगा तन सारा |
ऐसी अन्य विशाल मूर्ति का कहीं नहीं उल्लेख ||
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
ऐसा ध्यान लगाया प्रभु को रहा न ये आभास |
किस-किस ने चरणारविंद में बना लिया है वास ||
बात उन्हें यह भी न पता थी तन लिपटी माधवी लता थी |
ये लाखों में एक नहीं है दुनिया भर में एक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
महक रहे चन्दन केशर पुष्पों की झड़ी लगी |
देखने को यह दृश्य भीड़ यहाँ कितनी बड़ी लगी ||
ऐसी छटा लगे मन भावन फागुन बन बरसे ज्यों सावन |
आज यहाँ वे जुड़े जिन्होंने जोड़े पुण्य अनेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
बीते वर्ष सहस्त्र मूर्ति यह कब की गढ़ी हुई |
खड़े तपस्वी का प्रतीक बन कब से खड़ी हुई ||
श्री चामुण्डराय की माता इसका श्रेय उन्हीं को जाता |
उनके लिए गढ़ी प्रतिमा से लाभान्वित प्रत्येक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
ऋषभ देव मातु सुनन्दा भ्राता भरत समान |
घुट्टी में श्री बाहुबली को मिला धर्म का ज्ञान ||
चक्रवर्ती का शीश झुकाकर, प्रभुता छोड़ी प्रभुता पाकर |
विजय गर्व से पहले प्रभु ने धरा दिगम्बर भेष ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
गोम्मटेश का है संदेश धारो अपरिग्रहवाद |
सब कुछ होते सब कुछ त्यागो वो भी बिना विषाद ||
भौतिक बल पर मत इतराओ, दया क्षमा की शक्ति बढ़ाओ |
आत्महितके हेतु हृदय में जागृत करो विवेक |
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |
धन्य-धन्य वे लोग, यहाँ जो आज रहे सर टेक ||
मस्तकाभिषेक – महा मस्तकाभिषेक |