भक्ति: बाहुबली भगवान

अति पुण्य उदय मम आया, श्री जी के अभिषेक का अवसर पाया
आदिनाथ जी के तुम छोटे नन्दन, करता तुमको सारा जग वन्दन
जगत भर की सम्पत्ति न तुम्हें मन भाई, मुक्ति वधु ही तुम्हारे मन में रमाई
भरत चक्रवर्ती को भी तुमने ही जीता, पश्चात भी तुम्हारा मन भीगा
सगे भाई को हराया, ये कर मैंने क्या पाया
वैराग्य तुरन्त ही मन में आया, संसार त्याग मुक्ति पर ध्यान लगाया
कीनी तपस्या तुमने भारी, ऋद्धियाँ-सिद्धियां भी तुमसे हारीं
तप में भी ना था तुमसा कोई, पिता पूर्व मुक्ति तुमने पाई
किया नाश आठों कर्मों का, तब तुमने केवल पद पाया
ऐसे सिद्ध को नमन हमारा, तरसे दर्शन को जीवन सारा
नाथ तुमसे है एक ही विनती, दे दो आठों कर्मों से मुक्ति
बाहुबली है नाम तुम्हारा, तुमसा जीवन बने हमारा...


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