अष्ट द्रव्य को अर्घ्य संजायो, घंटा नाद बजाई |
गीत-नृत्य कर जजों जवाहर, आनन्द हर्ष बधाई ||
जम्बूद्वीप भरत-आरज में, सोरठ देश सुहाई |
शेषावन के निकट अचल तंह, नेमिनाथ शिव पाई ||
ॐ ह्रीं श्री गिरनार सिद्धक्षेत्र अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ||