श्री सन्मति प्रभु की आरती

ॐ जय सन्मति देवा, प्रभु जय सन्मति देवा |
वीर महा-अतिवीर, प्रभु जी वर्धमान देवा || ॐ जय....
त्रिशला-उर अवतार लिया, प्रभु सुर-नर हरषाए |
पन्द्रह मास रत्न कुंडलपुर, धनपति बरसाये || ॐ जय...
शुक्ल त्रयोदशी चैत्रमास की, आनन्द करतारी |
राय सिद्धारथ घर जन्मोत्सव, ठाठ रचे भारी || ॐ जय...
तीस वर्ष तक रहे गेह में, बाल ब्रह्मचारी |
राज त्यागकर बहर यौवन में, मुनि दीक्षा धारी || ॐ जय...
द्वादश वर्ष किया तप दुद्धर्र, विधि चकचूर किया |
झलके लोकालोक ज्ञान में, सुख भरपूर लिया || ॐ जय...
कार्तिक श्याम अमावस के दिन, जाकर मोक्ष बसे |
पर्व दिवाली चला तभी से, घर-घर दीप सजे || ॐ जय...
वीतराग सर्वग्य हितैषी, शिवमग परकाशी |
हरि हर ब्रम्हा नाथ तुम्हीं हो, जय-जय अविनाशी || ॐ जय...
दीनदयाला जग-प्रतिपाला, सुर-नरनाथ जजें |
सुमिरत विघ्न टरे इक छिन में, पातक दूर भगें || ॐ जय...
चोर भील चांडाल उबारे, भव दुखहरण तुही |
पतित जान हमें आज उबारो, हे जिन! तुम शरण गही || 
ॐ जय सन्मति देवा, प्रभु जय सन्मति देवा |
वीर महा-अतिवीर, प्रभु जी वर्धमान देवा ||

प्रिंट करें