ॐ णमो अरिहंताणं जप अरिह्न्तों का ध्यान करूं |
ॐ णमो सिद्धाणं जप कर सिद्धों का गुणगान करूं ||
ॐ णमो आयरियाणं जप आचार्यों को नमन करूं |
ॐ णमो उवज्झायाणं जप उपाध्यायों को नमन करूं ||
णमो लोए सव्वसाहूणं जप सर्व साधुओं को वन्दन |
णमोकार महामंत्र जप मिथ्यातम को करूं वमन ||
एसो पंच णमोकारो जप सर्व पाप अवसान करूं |
सर्व मंगल में पहला मंगल पढ़ मंगल गान करूं ||
णमोकार का मन्त्र जपूँ मैं णमोकार का ध्यान करूं |
णमोकार की महाशक्ति से निज आतम कल्याण करूं ||
ॐ ह्रीं श्री पंचनमस्कारमंत्र! अत्र अवतर अवतर संवौषट आह्वाह्न्म |
ॐ ह्रीं श्री पंचनमस्कारमंत्र! अत्र तिष्ठ: ठ: ठ: स्थापनम |
ॐ ह्रीं श्री पंचनमस्कारमंत्र! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट सन्निधिकरणम |
ज्ञानावरणी कर्मनाश हित मिथ्यातम का करूं आभाव |
जन्म मरण दुख क्षय डालूँ प्राप्त करूं निज शुद्धस्वभाव ||
णमोकार का मन्त्र जपूँ मैं णमोकार का ध्यान करूं |
णमोकार की महाशक्ति से निज आतम कल्याण करूं ||
ॐ ह्रीं श्री पंचनमस्कारमंत्राय जन्मजरामृत्युविनाशनाय जलं निर्वपामीति स्वाहा |
दर्शनावरणी क्षय करने चिर अविरति का करूं आभाव |
यह संसारताप क्षय करने प्राप्त करूं निज शुद्धस्वभाव ||
णमोकार का मन्त्र जपूँ मैं णमोकार का ध्यान करूं |
णमोकार की महाशक्ति से निज आतम कल्याण करूं ||
ॐ ह्रीं श्री पंचनमस्कारमंत्राय भवातापविनाशनाय चंदनं निर्वपामीति स्वाहा |
वेदनीय की पीड़ा हरने करलूं पंच प्रमाद अभाव |
अक्षय पद पाने को स्वामी प्राप्त करूं निज शुद्धस्वभाव ||
णमोकार का मन्त्र जपूँ मैं णमोकार का ध्यान करूं |
णमोकार की महाशक्ति से निज आतम कल्याण करूं ||
ॐ ह्रीं श्री पंचनमस्कारमंत्राय अक्षयपदप्राप्तये अक्षतान निर्वपामीति स्वाहा ।
मोहनीय का दर्प कुचल दूं करलूं पूर्ण कषाय अभाव |
कामबाण की व्याधि मिटाऊँ प्राप्त करूं निज शुद्धस्वभाव ||
णमोकार का मन्त्र जपूँ मैं णमोकार का ध्यान करूं |
णमोकार की महाशक्ति से निज आतम कल्याण करूं ||
ॐ ह्रीं श्री पंचनमस्कारमंत्राय कामबाणविध्वंसनाय पुष्पं निर्वपामीति स्वाहा ।
आयु कर्म के सर्वनाश हित शीघ्र करूं त्रय योग अभाव |
क्षुधा व्याधि का नाश करूं मैं प्राप्त करूं निज शुद्धस्वभाव ||
णमोकार का मन्त्र जपूँ मैं णमोकार का ध्यान करूं |
णमोकार की महाशक्ति से निज आतम कल्याण करूं ||
ॐ ह्रीं श्री पंचनमस्कारमंत्राय क्षुधारोगविनाशनाय नेवैद्यम निर्वपामीति स्वाहा ।
नाम कर्म का मूल मिटा दूं नष्ट करूं मैं सर्व विभाव |
भ्रम अज्ञान विनाश करूं मैं प्राप्त करूं निज शुद्धस्वभाव ||
णमोकार का मन्त्र जपूँ मैं णमोकार का ध्यान करूं |
णमोकार की महाशक्ति से निज आतम कल्याण करूं ||
ॐ ह्रीं श्री पंचनमस्कारमंत्राय मोहान्धकारविनाशनाय दीपं निर्वपामीति स्वाहा ।
गोत्रकर्म को दग्ध करूं मैं कर्म प्रकृति सर्व करूं अभाव |
अष्टकर्म विध्वंस करूं मैं प्राप्त करूं निज शुद्धस्वभाव ||
णमोकार का मन्त्र जपूँ मैं णमोकार का ध्यान करूं |
णमोकार की महाशक्ति से निज आतम कल्याण करूं ||
ॐ ह्रीं श्री पंचनमस्कारमंत्राय अष्टकर्मदहनाय धूपं निर्वपामीति स्वाहा ।
अन्तराय मूलोच्छेद क्र सर्व बंध का करूं अभाव |
परम मोक्ष फल पाऊँ स्वामी प्राप्त करूं निज शुद्धस्वभाव ||
णमोकार का मन्त्र जपूँ मैं णमोकार का ध्यान करूं |
णमोकार की महाशक्ति से निज आतम कल्याण करूं ||
ॐ ह्रीं श्री पंचनमस्कारमंत्राय मोक्षफलप्राप्तये फलं निर्वपामीति स्वाहा ।
परमभेद विज्ञान प्राप्त कर, कर लूं मैं संसार अभाव |
पद अनर्घ्य पाने को स्वामी प्राप्त करूं निज शुद्धस्वभाव ||
णमोकार का मन्त्र जपूँ मैं णमोकार का ध्यान करूं |
णमोकार की महाशक्ति से निज आतम कल्याण करूं ||
ॐ ह्रीं श्री पंचनमस्कारमंत्राय अनर्घ्यपदप्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ।
जयमाला
(दोहा)
णमोकार जिन मन्त्र का जाप करूं दिन-रात |
पाप-पुण्य को नाश कर पाऊं मोक्ष प्रभात ||
छयालीस गुणधारी स्वामी नमस्कार अरिह्न्तों को |
अष्ट स्वगुणधारी अनंतगुण मंडित वंदूं सिद्धों को ||1||
है छत्तीस गुणों से भूषित नमस्कार आचार्यों को |
है पच्चीस गुणों से भूषित नमस्कार उपाध्यायों को ||2||
अठ्ठाईस मूल गुणधारी नमस्कार सब मुनियों को |
ॐ शब्द से गर्भित पाचों परमेष्ठी प्रभु गुणियों को ||3||
सर्व मंगलों में सर्वोत्तम सर्वश्रेष्ठ मंगलदाता |
ह्रीं शब्द में गर्भित चौबीसों तीर्थंकर विख्याता ||4||
णमोकार पैंतीस अक्षर कम मंत्र पवित्र ध्यान कर लूं |
यह नवकार मन्त्र अडसठ अक्षर से युक्त ज्ञान कर लूं ||5||
अर्हंत सिद्धाचार्योपाध्याय सर्व साधु नम: भज लूं |
सोलह अक्षर का यह पावल मंत्र जपूँ दुष्कृत तज लूं ||6||
छह अक्षर का मंत्र जपूँ अरहंत सिद्ध को नमन करूं |
अ सि आ उ सा पंचाक्षर का मंत्र जपूँ अघ शमन करूं ||7||
अक्षर चार मंत्र जप लूं अरहंत देव का ध्यान करूं |
‘अर्हम’ अक्षर तीन मंत्र जप स्वपर भेद विज्ञान करूं ||8||
दो अक्षर का ‘सिद्ध’ मंत्र जप सर्व सिद्धियां प्रकट करूं |
अक्षर एक ‘ॐ’ ही जपकर सब पापों को विघट करूं ||9||
सप्ताक्षर का मंत्र ‘णमो अरिहंताणं’ का मैं जाप करूं |
छह अक्षर का मंत्र ‘णमो सिद्धाणं’ जप भवताप हरूं ||10||
सप्ताक्षर का मंत्र ‘णमो आयरियाणं’ जप हर्षाऊँ |
सप्ताक्षर का मंत्र ‘णमो उवज्झायाणं’ जप कर मुस्काऊँ ||11||
नौ अक्षर का मंत्र ‘णमो लोए सव्वसाहूणं’ ध्याऊँ |
‘एसो पंच णमोक्कारो’ जप सर्व पाप हर सुख पाऊँ ||12||
नवपद या नवकार पांच पद का मैं णमोकार ध्याऊँ |
एक शतक सत्ताईस अक्षर का चत्तारि पाठ गाऊँ ||13||
‘चत्तारि मंगलं’ श्रेष्ठ मंगल है जग में परम प्रधान |
‘अरहंता मंगलं’ पाठ कर गाऊँ निज आतम के गान ||14||
‘सिद्ध मंगलं’, ‘साहू मंगलं’का मैं भाव हृदय में बहर लूं |
‘केवलि पण्णत्तो धम्मो मंगल’ स्वधर्म प्राप्त कर लूं ||15||
‘चत्तारि लोगुत्तमा’ ही सर्वोत्तम है परम शरण |
‘अरिहंत लोगुत्तमा’ ही से होगा भव कष्ट हरण ||16||
‘सिध्दा लोगुत्तमा’ सु ‘साहू लोगुत्तमा’ परम पावन |
‘केवलि पण्णत्तो धम्मो लोगुत्तमा’ मोक्ष साधन ||17||
‘चत्तारि शरणं पव्वज्जामि’ का गूंजे जय-जय गान |
‘अरिहंत शरणं पव्वज्जामि’ का हो प्रभु लक्ष्य महान ||18||
‘सिध्दे शरणं पव्वज्जामि’ मोक्ष सिद्ध को मैं पाऊँ |
‘साहू शरणं पव्वज्जामि’ शुद्ध भाव से नित ध्याऊँ ||19||
‘केवलिपण्णत्तो धम्मो शरणं पव्वज्जामि’ है ध्येय |
महामोक्ष मंगल शिवदाता पाँचों परमेष्ठी प्रभु श्रेय ||20||
महामंत्र नि:काक्षित होकर शुद्ध भाव से नित ध्याऊँ |
पंच परम परमेष्ठी का सम्यक स्वरूप उर में लाऊँ ||21||
णमोकार का मंत्र जपूँ मैं णमोकार का ध्यान करूं |
महामंत्र की महाशक्ति पा नाथ आत्म कल्याण करूं ||22||
अर्हं अर्हं अर्हं जपकर निज शुद्धातम कर लूं भान |
नम: सर्व सिद्धेभ्य: जपकर मोक्षमार्ग पर करूं प्रयाण ||23||
ॐ ह्रीं श्री पंचनमस्कारमंत्राय अनर्घ्यपदप्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ।
(दोहा)
णमोकार के मन्त्र की महिमा अगम अपर |
भाव सहित जो ध्यावते हो जाते भव पार ||
इत्याशीर्वाद: पुष्पांजलि क्षिपेत