ॐ जय शीतलस्वामी, प्रभु जय शीतलस्वामी ।
घृतदीपक से करूँ आरती, तुम अन्तर्यामी ।। ॐ जय...
भद्दिलपुर में जन्म लिया प्रभु, दृढ़रथ पितु नामी |
मात सुनन्दा के नन्दा तुम, शिवपथ के स्वामी ।।1|| ॐ जय...
जन्म समय इन्द्रों ने, उत्सव खूब किया |
मेरू सुदर्शन ऊपर, अभिषव खूब किया ।।2।। ॐ जय...
पंचकल्याणक अधिपति, होते तीर्थंकर ।
तुम दसवें तीर्थंकर, हो प्रभु क्षेमंकर ||3|| ॐ जय...
अपने पूजक निन्दक के प्रति, तुम हो वैरागी |
केवल चित्त पवित्र करन निज, तुम पूजें रागी ||4|| ॐ जय...
चन्दन मोती माला आदी, शीतल वस्तु कहीं |
चन्द्ररश्मि गंगाजल में भी, शाश्वत शान्ति नहीं ||5|| ॐ जय...
पाप प्रणाशक शिव सुखकारक, तेरे वचन प्रभो |
आत्मा को शीतलता शाश्वत, दे तव कथन विभो ||6|| ॐ जय
जिनवर प्रतिमा जिनवर जैसी, हम यह मान रहे |
प्रभो करे भक्त तव आरति, भव दुख हानि करे ||7||
ॐ जय शीतलस्वामी, प्रभु जय शीतलस्वामी ।
घृतदीपक से करूँ आरती, तुम अन्तर्यामी ।।
घृतदीपक से करूँ आरती, तुम अन्तर्यामी ।। ॐ जय...
भद्दिलपुर में जन्म लिया प्रभु, दृढ़रथ पितु नामी |
मात सुनन्दा के नन्दा तुम, शिवपथ के स्वामी ।।1|| ॐ जय...
जन्म समय इन्द्रों ने, उत्सव खूब किया |
मेरू सुदर्शन ऊपर, अभिषव खूब किया ।।2।। ॐ जय...
पंचकल्याणक अधिपति, होते तीर्थंकर ।
तुम दसवें तीर्थंकर, हो प्रभु क्षेमंकर ||3|| ॐ जय...
अपने पूजक निन्दक के प्रति, तुम हो वैरागी |
केवल चित्त पवित्र करन निज, तुम पूजें रागी ||4|| ॐ जय...
चन्दन मोती माला आदी, शीतल वस्तु कहीं |
चन्द्ररश्मि गंगाजल में भी, शाश्वत शान्ति नहीं ||5|| ॐ जय...
पाप प्रणाशक शिव सुखकारक, तेरे वचन प्रभो |
आत्मा को शीतलता शाश्वत, दे तव कथन विभो ||6|| ॐ जय
जिनवर प्रतिमा जिनवर जैसी, हम यह मान रहे |
प्रभो करे भक्त तव आरति, भव दुख हानि करे ||7||
ॐ जय शीतलस्वामी, प्रभु जय शीतलस्वामी ।
घृतदीपक से करूँ आरती, तुम अन्तर्यामी ।।