श्री शांतिनाथ भगवान की आरती

जय जिनवर देवा, प्रभु जय जिनवर देवा |
शांति विधाता शिव सुख दाता शांतिनाथ देवा ||
ऐरा देवी धन्य जगत में, जिस उर आन बसे |
विश्वसेन कुल नभ में मानों पूनम चन्द्र लसे ||
कृष्ण चतुर्दशी जेठ मास की आनन्द करतारी |
हस्तिनापुर में जन्म महोत्सव ठाठ रचे भारी ||
बाल्यकाल की लीला अद्भुत, सुरनर मन भाई |
न्याय नीति से राज्य कियो चिर सबको सुखदाई ||
पंचम चक्री काम द्वादशम सोलम तीर्थंकर |
त्रय पदधारी तुमही मुरारी ब्रम्हा शिव शंकर ||
भवतन भोग समझ क्षणभंगुर मुनि व्रत धार लिए |
षट खंड नवनिधि रतन चतुर्दश त्रिनवत छोड़ दिए ||
दुद्धर तपकर करम निवारे केवल ज्ञान लहा |
दे उपदेश भविक जन बोधे ये उपकार किया ||
शांतिनाथ है नाम तुम्हारा सब जग शांति करो |
अरज करे ये भक्त चरण में भव आताप हरो ||
जय जिनवर देवा, प्रभु जय जिनवर देवा |
शांति विधाता शिव सुख दाता शांतिनाथ देवा ||

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