श्री जिनवाणी माता आरती

हे स्यादवाद माता, हम शरण लही तेरी |
          करुणाकर समरस से, भाव-भाव की मिटे फेरी ||
निज-वैभव भूल था, माँ तुमने बताया है |
         विष-विषय बताकर के, सन्मार्ग दिखाया है ||
शिवमार्ग चहुँ मैं माँ, हो स्वानभूती मेरी |
         हे स्यादवाद माता, हम शरण लही तेरी ||
मिथायत्व-कषाय-मयी, मद-मोह मिटाने को |
         षट-द्रव्य धर्म सत को, नए पेक्ष बताने को ||
माँ आप ही दर्पण हो, पुरुषार्थ निधि मेरी |
         हे स्यादवाद माता, हम शरण लही तेरी ||
चहुँगति से तिराने को, चारों अनुयोग्मायी |
         रत्नत्रय नौका हो, और द्वादशांग जिनकी ||
हमको भी तरना है, संसार सिन्धु फेरी |
         हे स्यादवाद माता, हम शरण लही तेरी ||
एकान्तवाद-तम की, तुम ज्ञान किरण सविता |
         हम स्यादवाद हों, पी शांति सुधा सुचिता |
सन्मति सुख पाने को, माँ विनय भक्ति तेरी |
         हे स्यादवाद माता, हम शरण लही तेरी |
करुणाकर समरस से, भाव-भाव की मिटे फेरी ||

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